Tuesday, 19 March 2013

शायरी हमारी ज़ुबानी






मंजिल मिलती हैं हर मोड़ पे 
मंजिल मिलती हैं हर मोड़ पे ।  
बेनाम हैं दिल कि मंजिल 
जब निगाह रुक्ती हैं आप पे ॥
  
**************************************************
कैसे  कशिश  है  आपके  प्यार  में 
लम्हें  कटते   नहीं आपके  इंतज़ार में । 
साँसों  से  जुडी  उन  एह्सासोंके  लम्होमें 
भाव्रिंसी होगई उन हँसीं  खयालोंमें॥

****************************************************
मस्ती  भरी आपके आँखों  में
डूब  जाये गुस्ताकी  ही सहीं ।  
प्यार भरे आपके दिल में 
बस जाये आपसे बेशुमार  मोह्बत  ही सहीं ॥ 

****************************************************
ये   रात  यूँ लम्बी ना होती 
काश  हमें  किसीकी इंतज़ार ना  होती 
पलके बिछाके  उस  राह  पे   अभी  खड़े हैं 

काश  दिल कि  ऐसी मजबूरी ना होती 
हमें  इतनी  मोह्बत  ना  होती 


No comments:

Post a Comment